अम्बाला छावनी, 13 जनवरी 2026: अम्बाला छावनी के नागरिक अस्पताल (Civil Hospital) में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। हरियाणा मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HMSCL) द्वारा अस्पताल को 68,32,000/- रुपये (अड़सठ लाख बत्तीस हजार रुपये) की लागत वाला अत्याधुनिक 4K आर्थ्रोस्कोपी कैमरा सिस्टम (4K Arthroscopy Camera System) सप्लाई किया गया है
पीएमओ डॉ. पूजा पैंटल ने साझा किया विजन: इस गौरवशाली उपलब्धि पर जानकारी देते हुए अस्पताल की पीएमओ (PMO) डॉ. पूजा पैंटल ने बताया कि यह नई मशीन सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव है। उन्होंने कहा कि “हमारा मुख्य लक्ष्य आम आदमी को वह तकनीक प्रदान करना है जो अब तक केवल बड़े कॉर्पोरेट अस्पतालों तक सीमित थी। 4K आर्थ्रोस्कोपी सिस्टम की विजुअल क्वालिटी सामान्य कैमरों से चार गुना अधिक स्पष्ट है। इससे जोड़ों के भीतर की मांसपेशियों, लिगामेंट्स और कार्टिलेज की अत्यंत बारीक तस्वीरें स्क्रीन पर दिखाई देंगी, जिससे सर्जरी के दौरान सटीकता (Precision) शत-प्रतिशत सुनिश्चित की जा सकेगी।” डॉ. पैंटल ने यह भी जोड़ा कि इस मशीन के आने से ‘स्पोर्ट्स इंजरी’ (खेल के दौरान लगी चोट) और जोड़ों के जटिल रोगों का इलाज अब सरकारी दर पर संभव होगा।
मशीन के सेटअप और तकनीकी निरीक्षण के दौरान हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी मोदगिल ने इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस कैमरा सिस्टम के माध्यम से होने वाली ‘की-होल’ (Key-hole) सर्जरी से मरीज को बहुत कम रक्तस्राव होता है, दर्द कम होता है और वह बहुत कम समय में अपने घर लौट सकता है। निरीक्षण के इस अवसर पर डॉ. सुनील कुमार, डॉ. अमन सैनी और डॉ. विनोद कंबोज भी मौजूद रहे। डॉक्टरों की इस विशेषज्ञ टीम ने मशीन की कार्यप्रणाली को समझा और इसे क्षेत्र के मरीजों के लिए एक बड़ा वरदान बताया।
तकनीकी सहयोग और प्रबंधन: अस्पताल की इस तकनीकी उन्नति में बायो-मेडिकल इंजीनियर (BME) संजय लाड़वाल और ओटीए (OTA) जगमाल का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने मशीन की इंस्टॉलेशन और भविष्य के रखरखाव को लेकर दिशा-निर्देश साझा किए।
गरीब मरीजों को मिलेगी राहत: आमतौर पर निजी अस्पतालों में आर्थ्रोस्कोपी सर्जरी पर लाखों का खर्च आता है, लेकिन सिविल अस्पताल अम्बाला छावनी में ₹68.32 लाख की इस मशीन के लग जाने से अब गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को यह उच्च तकनीक वाली चिकित्सा सुविधा नि:शुल्क या न्यूनतम खर्चे पर उपलब्ध होगी। इससे न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों को भी बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा।





