अम्बाला/चंडीगढ़, 31 मार्च – गत दिवस प्रगतिशील लेखक संघ,अम्बाला इकाई ने ट्रिब्यून ने अंबाला कैंट में उर्दू के उस्ताद शायर अकीमुद्दीन अकीम मंडावरी के लिए रूबरू एवं सम्मान समारोह आयोजित किया। समारोह की अध्यक्षता प्रलेस अंबाला अध्यक्ष तनवीर जाफ़री ने की, जबकि प्रो. वीएसवीएम ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. विनय मल्होत्रा मुख्य अतिथि व जन वादी लेखक संघ के प्रदेशाध्यक्ष जयपाल विशिष्ठ अतिथि के रूप में शामिल हुए।
समारोह का पहला सत्र ‘शायर से संवाद’ था, जिसे प्रलेस अंबाला सचिव प्रो. गुरदेव सिंह देव ने संचालित किया। उन्होंने कवि अक़ीम मंडावरी से उनके जीवन, रचनात्मक प्रक्रिया, वर्तमान साहित्य की स्थिति, ग़ज़ल शैली, उर्दू ग़ज़ल आदि से संबंधित विचारों के बारे में प्रश्न पूछे। शायर अक़ीम मंडावरी ने सभी सवालों के शायराना अंदाज़ में जवाब दिए।
अपने जीवन के बारे में, अकीम ने बताया कि वह एक साधारण परिवार पैदा हुए, बारहवीं कक्षा तक पढ़ाई की और फिर अपने पिता के साथ कारपेंटर का पुश्तैनी काम लगे।उन्होंने बताया की उर्दू शायरी के प्रति प्रेम उनके उस्ताद जनाब असलम क़ुरैशी जगाया था। पहले शेअर लिखने लगे और फिर उन्होंने 7वीं कक्षा में पढ़ते समय अपनी पहली कविता लिखी थी। हालांकि उन्होंने नज़्में और गीत भी लिखे हैं लेकिन उनकी पसंदीदा शैली ग़ज़ल है। ग़ज़ल कहने में महारत हासिल करने के लिए उन्होंने मौलाना हाली की मशहूर किताब मुकदमा औ शेयरो शायरी पढ़ी। उनके पसंदीदा कवि मिर्ज़ा ग़ालिब है, लेकिन मीर, फ़ैज़ दाग़ मोहम्मद इक़बाल इब्ने रशीद व बशीर बद्र भी पसंद हैं। उन्होंने कहा कि आज वह इस मुकाम पर पहुँच गए हैं कि उन्हें भारत के विभिन्न शहरों में कविता पढ़ने के लिए आमंत्रित किया जाता है।इस बातचीत के दौरान, उन्होंने हाजिर कवियों व श्रोताओं के कहने पर अपने कई शेयर, ग़ज़लें और कविताएँ सुनाईं। “ दिल को ख़ुश नहीं करती कैसी शादमानी है।तनहा तनहा लमहों की दुख भरी कहानी है ।“
समारोह के दूसरे दौर में, अकीमुद्दीन अकीम को प्रलेस अध्यक्ष तनवीर जाफरी, जनवादी लेखक संघ के प्रदेशाध्यक्ष जयपाल, वीएसवीएम ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. विनय मल्होत्रा, मंडावरी के शिष्य जगमाल राणा और सचिव प्रो. गुरदेव सिंह देव ने माला, दुशाला और नकद राशि देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आज भी मुशायरों की परंपरा वैसे ही जारी है और अकेले मुरादाबाद में हज़ारों शायर हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कभी-कभी बड़े से बड़ा शायर भी ग़ज़ल सुनाने में निराश हो जाता है। एक सवाल के जवाब में अकीम ने बड़े अफ़सोस के साथ कहा कि उनके बहुत से शागिर्द हैं लेकिन उनमें से आधे ही पब्लिक में तस्लीम करते हैं। इस बातचीत की सबसे बड़ी कामयाबी यह रही कि शायर अकीम ने सवालों के जवाब देते हुए उर्दू ग़ज़लों को पोयटिक नज़रिए व अरूज़ के ज़ाविए से समझने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया ।
चौथे राउंड में लोकल शायरों ने अपनी रचनाएँ पेश कीं। कवि एवं रंगकर्मी यादविंदर सिंह कलौली, राजिंदर कौर, डॉ. विजय चोपड़ा, जय पाल, तनवीर जाफरी के साथ मानव समिति के पूर्व प्रेसिडेंट एडवोकेट कृष्ण अवतार सूरी, गुरदेव सिंह देव, जगमाल राणा, रोटरी क्लब के प्रधान डॉ. जुगिंदर सिंह, रोटरी क्लब के पूर्व प्रधान दली प मेहता, डॉ. रतन सिंह ढिल्लों, विशाल शर्मा, डॉ. विनय मल्होत्रा ने अपनी रचनाएं सुनाईं। श्रोताओं में प्रो इकबाल चौहान, सुनील अरोड़ा, हरबंस सिंह आत्मा सिंह ,भगवंत सिंह व विवेक नलिन हाज़िर रहे ।
प्रलेस अंबाला द्वारा उस्ताद शायर अक़ीमुद्दीन अक़ीम का रूबरू व सम्मान समारोह आयोजित ।
