अम्बाला छावनी नागरिक अस्पताल में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का सफल आयोजन: बच्चों को दी गई अलबेंडाजोल की खुराक

अम्बाला छावनी, 21 अप्रैल 2026: बच्चों के सर्वांगीण विकास और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आज अम्बाला छावनी के नागरिक अस्पताल में ‘राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस’ के उपलक्ष्य में एक विशेष और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को पेट के कीड़ों से मुक्त कर उन्हें कुपोषण और एनीमिया जैसी गंभीर समस्याओं से बचाना था। अभियान का शुभारंभ नागरिक अस्पताल की पीएमओ डॉ. पूजा पैंटल ने स्वयं नन्हे-मुन्ने बच्चों को अलबेंडाजोल की दवा खिलाकर किया। इस अवसर पर उनके साथ चिकित्सा जगत के डीएमएस डॉ. विनय गोयल, एसएमओ डॉ. सुनील कुमार, डॉ. नीनू गांधी, डॉ. जोगिंदर और काउंसिलर शालिनी सहित अस्पताल का अन्य स्टाफ भी विशेष रूप से उपस्थित रहा।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अभिभावकों और नागरिकों को संबोधित करते हुए पीएमओ डॉ. पूजा पैंटल ने कृमि मुक्ति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बच्चों के पेट में कृमि या कीड़े होना एक गंभीर समस्या है जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास में बड़ी बाधा बनती है। पेट में कीड़े होने के कारण बच्चे जो भी पोषक तत्व ग्रहण करते हैं, वे उन्हें पूरी तरह नहीं मिल पाते, जिससे वे धीरे-धीरे कुपोषण और एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी का शिकार हो जाते हैं। डॉ. पैंटल ने जोर देकर कहा कि समय पर कृमि मुक्ति की दवा देने से न केवल बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, बल्कि उनका शैक्षणिक प्रदर्शन और ऊर्जा स्तर भी बेहतर होता है।
इस मौके पर डॉ. विनय गोयल ने दवा की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के मन में उठने वाली शंकाओं का समाधान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाने वाली अलबेंडाजोल की यह खुराक पूरी तरह से सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है। 1 से 19 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे और किशोर के लिए यह दवा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी जानकारी साझा की कि स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न टीमें जिले के तमाम शिक्षण संस्थानों, स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से इस अभियान को घर-घर तक पहुँचाने में जुटी हुई हैं ताकि समाज का कोई भी वर्ग इस सुरक्षा कवच से अछूता न रहे।
अभियान के दौरान अस्पताल के एस एम ओ डॉ. सुनील कुमार, डॉ. नीनू गांधी और डॉ. जोगिंदर ने भी स्वच्छता और स्वास्थ्य के अंतर्संबंधों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि केवल दवा खाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में संक्रमण से बचने के लिए हाथों की सफाई, स्वच्छ पेयजल का उपयोग और नाखूनों को छोटा रखना जैसी अच्छी आदतों को अपनाना भी अनिवार्य है। कार्यक्रम के अंत में अस्पताल प्रशासन ने उन अभिभावकों से विशेष अपील की जिनके बच्चे किसी कारणवश आज दवा नहीं खा पाए हैं। प्रशासन ने सूचित किया कि ऐसे सभी बच्चों के लिए जल्द ही ‘मॉप-अप’ राउंड का आयोजन किया जाएगा, जिसके दौरान वे अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या चिन्हित स्थानों पर जाकर यह दवा अवश्य लें। इस प्रकार के सामुदायिक प्रयासों और सामूहिक सहभागिता से ही हम अपने जिले और देश को कृमि मुक्त और स्वस्थ बना सकते हैं।

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